Description
भारत में श्रमिक वर्ग आज अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कम वेतन, बेरोजगारी, असुरक्षित कार्यस्थल, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक सुरक्षा की कमी, बाल श्रम और महिला श्रमिकों के शोषण जैसे मुद्दे आज भी सभी जगह व्यापत हैं। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिक जो लंबे समय तक परिश्रम करते हैं। फिर भी ये उचित वेतन, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहते हैं। ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में पलायन ने रोज़गार की प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है, जिससे प्रवासी श्रमिकों के लिए सम्मानजनक जीवनयापन कठिन हो गया है।
इन परिस्थितियों में सरकार, नियोक्ता और समाज की साझा जिम्मेदारी आवश्यक है। साथ ही श्रम कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, न्यूनतम वेतन की सुनिश्चितता, सुरक्षित और गरिमापूर्ण कार्यस्थल तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार हो, जिससे श्रमिकों की स्थिति में सुधार हो सके। कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण रोज़गार के अवसर को बढ़ाने में सहायक हैं। बाल श्रम और महिला शोषण के विरुद्ध जागरूकता तथा ट्रेड यूनियन और श्रमिक सहकारी समितियाँ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए प्रभावी प्रयास कर सकती हैं।
प्रस्तुत पुस्तक श्रम नीतियों की स्पष्ट समझ, सुदृढ़ औद्योगिक संबंधों और सकारात्मक कार्य वातावरण के निर्माण हेतु व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह पुस्तक छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, श्रमिकों, एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। साथ ही श्रमिक संगठनों, उद्योग प्रबंधकों और मानव संसाधन विशेषज्ञों के लिए यह एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।






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